अमेरिका-ईरान समझौते से भारत को क्या मिलेगा? तेल से लेकर LPG तक 5 बड़े फायदे
क्या है खबर?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर शुरुआती समझौते की घोषणा हुई है। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आई और ब्रेंट क्रूड करीब 83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है। इसका असर तेल, महंगाई, रुपये, गैस आपूर्ति और व्यापार समेत कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
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तेल आयात बिल और महंगाई पर पड़ सकता है असर
भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट सीधे देश के आयात बिल को कम कर सकती है। ICRA के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का तेल आयात बिल 13-14 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। वहीं विशेषज्ञों का अनुमान है कि 10 डॉलर की बढ़ोतरी से महंगाई में 0.55-0.60 प्रतिशत तक का अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
#2
रुपये और बॉन्ड बाजार को मिल सकता है सहारा
तेल की कीमतें घटने से तेल कंपनियों को आयात के लिए कम डॉलर की जरूरत पड़ती है। इससे रुपये पर दबाव कम हो सकता है। समझौते की घोषणा के बाद भारतीय रुपये में मजबूती की उम्मीद जताई गई है। वहीं भारत के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड पहले ही करीब 6.90 प्रतिशत तक आ गई थी। जानकारों का कहना है कि कम तेल कीमतें निवेशकों का भरोसा बढ़ाती हैं और वित्तीय बाजारों को भी सहारा देती हैं।
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LPG आपूर्ति के लिए बेहद अहम है होर्मुज
भारत ने तेल खरीद के स्रोत बढ़ाकर जोखिम कम किया है और अब करीब 70 प्रतिशत कच्चा तेल गैर-होर्मुज मार्गों से आता है। हालांकि, रसोई गैस के मामले में स्थिति अलग है। भारत अपनी LPG जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है और इनमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। ऐसे में इस मार्ग के खुलने से गैस आपूर्ति, शिपिंग खर्च और बीमा लागत पर दबाव कम हो सकता है।
#4
ईरानी तेल की वापसी से बढ़ सकते हैं विकल्प
भारत ने 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था। अगर नए समझौते के तहत प्रतिबंधों में राहत मिलती है तो ईरानी तेल फिर से भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंच सकता है। इससे भारत को रूस, इराक, सऊदी अरब, UAE और अमेरिका के अलावा एक और बड़ा विकल्प मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की सौदेबाजी की ताकत बढ़ेगी और बेहतर कीमतों पर तेल खरीदने का मौका मिल सकता है।
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चाबहार परियोजना को भी मिल सकता है फायदा
ईरान का चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का वैकल्पिक मार्ग देता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना की रफ्तार कई बार प्रभावित हुई है। अगर समझौते के बाद प्रतिबंधों में ढील मिलती है तो चाबहार परियोजना को नई गति मिल सकती है। इससे व्यापार, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है, जिसका फायदा भारत को लंबे समय तक मिल सकता है।