क्या लोन गारंटर बनने पर क्या पड़ता है असर? जानिए किन बातों का रखें ध्यान
क्या है खबर?
किसी दोस्त, रिश्तेदार के लिए लोन गारंटर बनना उसकी मदद करने का एक अच्छा काम लग सकता है। कानूनी नजरिए से देखें तो इसमें कई तरह की मुश्किलें हो सकती हैं क्योंकि यह भविष्य में आपके लोन लेने की क्षमता पर सीधा असर डाल सकता है। यह लोन देने वाली संस्था के आपके लोन चुकाने की क्षमता का आकलन और विश्लेषण कैसे करती हैं? आइए जानते हैं गारंटर बनने का आपके लोन लेने पर क्या असर पड़ता है।
जिम्मेदारी
गारंटर की क्या होती है जिम्मेदारी?
लोन गारंटर वह व्यक्ति होता है, जो मुख्य उधारकर्ता के भुगतान न कर पाने की स्थिति में बकाया लोन चुकाने के लिए सहमत होता है।
गारंटी पर हस्ताक्षर करके गारंटर लोन देने वाली संस्था के प्रति कानूनी रूप से जिम्मेदार हो जाता है।
इसका सीधा-सा मतलब है कि जब गारंटर की कोई और लोन लेने की क्षमता का आकलन किया जाएगा तो लोन देने वाली संस्था उस गारंटी वाले लोन को भी ध्यान में रख सकती है।
जांच
गारंटर बनने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
जानकारों का कहना है कि भारतीय कानून के तहत गारंटर की जिम्मेदारी उतनी ही होती है, जितनी उधार लेने वाले की।
गारंटर बनने से पहले लोन एग्रीमेंट की शर्तों और नियमों को ठीक से समझना जरूरी है। उधार लेने वाले की इनकम, मौजूदा EMI और वित्तीय स्थायित्व की जांच करें।
यह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में भी दिखाई दे सकता है। इससे आपके लोन लेते समय अधिक ब्याज, मंजूरी में देरी या आवेदन निरस्त होने की समस्या आ सकती है।