बजट 2026: क्या UPI लेनदेन पर बढ़ेगी सब्सिडी? कंपनियों ने की यह मांग
क्या है खबर?
भारत सरकार रविवार (1 फरवरी) को केंद्रीय बजट 2026 पेश करने जा रही है। इसमें हर क्षेत्र राहत की उम्मीद लगाकर बैठा है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय भुगतान परिषद (PCI) और अन्य भुगतान कंपनियों ने इस वर्ष वित्त मंत्रालय से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के लिए अधिक सब्सिडी की मांग की है। बता दें कि UPI हर महीने लेनदेन की मात्रा और मूल्य के नए रिकॉर्ड बना रहा है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर लगभग 30 प्रतिशत है।
MDR
बैंक वसूलते हैं लेनदेन पर MDR
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगता है, जो बैंकों द्वारा डिजिटल भुगतान की सुविधा प्रदान करने के लिए व्यापारियों से बिक्री केंद्र पर लिया जाने वाला शुल्क है। सरकार द्वारा 2020 में इसे माफ करने से पहले MDR 30 बेसिस पॉइंट था। एक बेसिस पॉइंट एक प्रतिशत का 100वां हिस्सा होता है। कंपनियां पिछले साल से अधिक सब्सिडी चाहती हैं, क्योंकि UPI को नए वर्गों तक पहुंचाने के लिए MDR आवश्यक है।
मांग
कंपनियों ने क्या की है मांग?
भुगतान और फिनटेक कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले PCI ने बड़े व्यापारियों (40 लाख रुपये से अधिक कारोबार) के लिए भुगतानों पर 30 बेसिस पॉइंट (bps) या 0.3 प्रतिशत के MDR को फिर से लागू करने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी मांग की है कि सरकार सभी रुपे डेबिट कार्ड लेनदेन के लिए MDR पर विचार करे, जो क्रेडिट कार्ड (लगभग 2 प्रतिशत) और गैर-रुपे डेबिट कार्ड (लगभग 0.75-0.9 फीसदी) के लिए मौजूदा MDR संरचना के अनुरूप है।
सब्सिडी
पिछले साल कितनी दी गई थी सब्सिडी
पिछले साल केंद्र सरकार ने व्यापारियों के यहां UPI लेनदेन के लिए 1,500 करोड़ रुपये की सब्सिडी की घोषणा की थी, जबकि उद्योग जगत को लगभग 5,000 करोड़ रुपये की उम्मीद थी। 2024 में सब्सिडी 3,500 करोड़ रुपये थी। नीति के अनुसार, 2,000 रुपये से कम के लेनदेन पर 15 बेसिस पॉइंट (bps) की सब्सिडी दी जाती है। इस प्लेटफॉर्म पर हर महीने 21.5 अरब से अधिक लेनदेन होते हैं, जिनका मूल्य 28 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।