प्रोफेशनल टैक्स क्या होता है और इनकम टैक्स से यह कैसे है अलग?
क्या है खबर?
भारत में लोगों को अपनी कमाई पर कई तरह के टैक्स देने पड़ते हैं। इनमें इनकम टैक्स के साथ कुछ अन्य टैक्स भी शामिल होते हैं। इन्हीं में से एक प्रोफेशनल टैक्स भी है। यह टैक्स राज्य सरकारें उन लोगों से लेती हैं जो नौकरी करते हैं या किसी पेशे से कमाई करते हैं। कई लोग इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते, लेकिन यह टैक्स समझना जरूरी है ताकि नियमों का सही पालन किया जा सके।
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प्रोफेशनल टैक्स क्या होता है?
प्रोफेशनल टैक्स एक डायरेक्ट टैक्स है जिसे राज्य सरकारें लगाती हैं। यह टैक्स नौकरी करने वाले लोगों, प्रोफेशनल्स और कुछ कारोबार करने वालों से लिया जाता है। अगर कोई व्यक्ति कंपनी में नौकरी करता है तो उसका एम्प्लॉयर उसकी सैलरी से यह टैक्स काट लेता है। वहीं जो लोग खुद का काम करते हैं, उन्हें यह टैक्स सीधे सरकार को देना पड़ता है। कानून के अनुसार इसकी अधिकतम सीमा सालाना 2,500 रुपये तक होती है।
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किन लोगों को देना पड़ता है यह टैक्स?
जिन राज्यों में प्रोफेशनल टैक्स लागू है, वहां नौकरी करने वाले कर्मचारियों को यह टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा, डॉक्टर, वकील, आर्किटेक्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे पेशेवर लोगों पर भी यह लागू हो सकता है। कई राज्यों में छोटे बिजनेस करने वाले या सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों को भी यह टैक्स देना पड़ता है। हालांकि, कम आय वाले लोगों को कई जगह इस टैक्स से छूट भी दी जाती है, जिसकी सीमा हर राज्य में अलग हो सकती है।
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इनकम टैक्स से कैसे अलग है?
इनकम टैक्स और प्रोफेशनल टैक्स दोनों बिलकुल अलग-अलग तरह के टैक्स हैं। इनकम टैक्स केंद्र सरकार लेती है और यह पूरे देश में लागू होता है। यह व्यक्ति की सालाना कमाई के आधार पर तय होता है। वहीं, प्रोफेशनल टैक्स राज्य सरकारें लगाती हैं और यह कुछ राज्यों में ही लागू होता है। इनकम टैक्स साल में एक बार भरा जाता है, जबकि प्रोफेशनल टैक्स आमतौर पर हर महीने सैलरी से काटा जाता है।