बिना वसीयत के किसी की मृत्यु होने पर क्या होगा? जानिए क्या कहते हैं नियम
क्या है खबर?
वसीयत होने पर किसी व्यक्ति की संपत्ति का उसके सही उत्तराधिकारियों में बंटवारा आसानी से हो जाता है। जब किसी व्यक्ति की बिना वसीयत बनाए मृत्यु हो जाती है तो ऐसे मामलों में उनकी संपत्ति का बंटवारा विवाद का कारण बन जाता है। ऐसे मामले कोर्ट तक पहुंच जाते हैं, जो सालों तक चलते रहते हैं। ऐसी स्थिति जानते हैं उस व्यक्ति के उत्तराधिकारियों के बीच संपत्ति का बंटवारा किस तरह से होता है।
मंशा
आपकी इच्छा के हिसाब से नहीं होता बंटवारा
बिना वसीयत वाले मामले में बंटवारा उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार किया जाता है। भारत में ये नियम व्यक्ति के पर्सनल लॉ के आधार पर अलग-अलग होते हैं।
इसलिए नतीजा हमेशा वैसा नहीं हो सकता जैसा आप चाहते हैं।
आप अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा किसी खास जरूरतों वाले बच्चे को देना चाहते हैं या अपने उस भाई-बहन को संपत्ति का कुछ हिस्सा देना चाहते हो तो वसीयत के बिना यह संभव नहीं हो पाता है।
अधिकार
कानून तय करता है हकदार?
कानून तय करता है कि कानूनी वारिस कौन हैं और संपत्ति का बंटवारा कैसे होगा? यही एक मुख्य कारण है कि लोगों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपनी वसीयत तैयार कर लें।
इसके होने से सभी कानूनी औपचारिकताएं खत्म नहीं हो जातीं, लेकिन इससे प्रक्रिया अक्सर आसान हो जाती है।
वसीयत न होने पर परिवार के सदस्यों को मृतक की संपत्ति पर अपना कानूनी अधिकार साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज दिखाने पड़ सकते हैं।
नॉमिनी
नाॅमिनी बनाना नहीं है पर्याप्त
कई लोग मानते हैं कि बैंक अकाउंट, इंश्योरेंस पॉलिसी या म्यूचुअल फंड में नॉमिनी जोड़ने का मतलब है कि उन्हें अब वसीयत की जरूरत नहीं है।
नॉमिनेशन से संपत्ति पाने की प्रक्रिया में मदद मिलती है, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि कानूनी तौर पर उसका वारिस कौन है?
कई मामलों में जब तक लागू उत्तराधिकार कानूनों के तहत कानूनी वारिसों के अधिकारों का पता नहीं चल जाता, तब तक नॉमिनी एक ट्रस्टी के तौर पर काम करता है।