बहुत ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखने का क्या है खतरा?
क्या है खबर?
क्रेडिट कार्ड हमारे जीवन को आसान बनाता है, लेकिन कई बार इसकी संख्या अधिक होने से हमारे ऊपर वित्तीय भार बढ़ जाता है। बैंक की तरफ से ऑफर दिए जाते हैं, मोबाइल ऐप तुरंत लिमिट दिखाते हैं और रिवॉर्ड इतने आकर्षक होते हैं कि लोग मना नहीं कर पाते। शुरुआत में लगता है कि सब कंट्रोल में है और खर्च संभला हुआ है, लेकिन धीरे-धीरे कार्ड बढ़ते जाते हैं और खर्च, जिम्मेदारी व मानसिक दबाव भी चुपचाप बढ़ने लगता है।
असर
क्रेडिट स्कोर पर पड़ने वाला असर
जब भी कोई नया क्रेडिट कार्ड लिया जाता है, तो बैंक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करता है। एक या दो बार यह सामान्य माना जाता है, लेकिन कम समय में कई कार्ड लेने पर बैंकों को शक होने लगता है। इससे लगता है कि व्यक्ति को पैसों की जरूरत ज्यादा है। बार-बार जांच होने से क्रेडिट स्कोर गिर सकता है, जिसका असर भविष्य में लोन, EMI और वित्तीय भरोसे पर साफ दिखाई देता है।
परेशानी
भुगतान में चूक से बढ़ती परेशानी
कई क्रेडिट कार्ड होने पर सबसे बड़ी दिक्कत भुगतान को लेकर ही आती है। हर कार्ड की अलग तारीख, अलग ब्याज दर और अलग नियम होते हैं। किसी एक तारीख के छूटते ही लेट फीस लग जाती है और ब्याज तेजी से बढ़ जाता है। यह छोटी सी चूक आपकी क्रेडिट हिस्ट्री खराब कर सकती है। धीरे-धीरे तनाव बढ़ता है और पूरी आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ने लगता है।
खतरा
मिनिमम भुगतान का छुपा खतरा
मिनिमम रकम चुकाने से लगता है कि समस्या फिलहाल टल गई है, लेकिन असल में कर्ज बना रहता है। ब्याज लगातार जुड़ता रहता है और कुल बकाया समझना मुश्किल हो जाता है। कई कार्ड होने पर यह भ्रम और बढ़ जाता है। बेहतर यही है कि सीमित कार्ड रखें, नए ऑफर सोच-समझकर लें और हर महीने पूरा भुगतान करें, ताकि भविष्य में बड़े वित्तीय नुकसान से सुरक्षित रहा जा सके।