उत्तर प्रदेश ने दावोस में करीब 9,800 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों पर किए हस्ताक्षर
क्या है खबर?
दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान उत्तर प्रदेश को बड़े निवेश प्रस्ताव मिले हैं। ग्लोबल कंपनियों और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठकों के बाद राज्य को कुल 9,750 करोड़ रुपये के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoUs) मिले। इन बैठकों में औद्योगिक विकास, तकनीक और रोजगार को लेकर चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि ये समझौते राज्य में निवेश बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को तेज करने की दिशा में अहम कदम हैं।
क्षेत्र
ऊर्जा, डाटा सेंटर और डिफेंस पर ध्यान
इन निवेश प्रस्तावों में सबसे बड़ा हिस्सा वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट का है, जिसके लिए अकेले SAEL इंडस्ट्रीज ने 8,000 करोड़ रुपये के बड़े निवेश की बात कही है। इसके अलावा, सिफी टेक्नोलॉजीज नोएडा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रेडी डाटा सेंटर और AI सिटी के लिए 1,600 करोड़ रुपये लगाएगी। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और हथियार सिस्टम से जुड़ी गतिविधियों के लिए येओमैन ने भी 150 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है।
बैठकें
सरकारी प्रतिनिधिमंडल की अहम बैठकें
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने दावोस में कई रणनीतिक बैठकें की हैं। इन बैठकों का मकसद राज्य में उद्योग और तकनीक आधारित विकास को आगे बढ़ाना था। प्रदेश सरकार का कहना है कि इन समझौतों से सतत विकास, तकनीक आधारित प्रशासन और बड़े स्तर पर रोजगार सृजन के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी। निवेशकों ने उत्तर प्रदेश की नीतियों और बिजनेस माहौल में भरोसा जताया है।
अन्य
ग्लोबल कंपनियों से बढ़ता भरोसा
समझौतों के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ बातचीत की है। इनमें उबर, गूगल क्लाउड, पेप्सिको, डेलॉइट, HCL सॉफ्टवेयर और अन्य कंपनियां शामिल रहीं। इन बैठकों में क्लीन एनर्जी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, AI और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि ये प्रयास राज्य को 1 लाख डॉलर (लगभग 90 लाख करोड़ रुपये) की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के करीब ले जाएंगे।