UPI लेनदेन की रफ्तार पर लगा ब्रेक, वृद्धि दर में 10 प्रतिशत की गिरावट
क्या है खबर?
भारत में डिजिटल भुगतान के सबसे बड़े माध्यम UPI की बढ़ती रफ्तार अब कुछ धीमी पड़ती दिख रही है। UPI से होने वाले लेनदेन लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन पिछले साल के मुकाबले वृद्धि दर में कमी आई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 के पहले चार महीनों में UPI पर 92 अरब लेनदेन हुए। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 23.5 प्रतिशत अधिक हैं।
लेनदेन
पिछले साल के मुकाबले घटी वृद्धि दर
अप्रैल से जुलाई के बीच UPI लेनदेन की संख्या 92 अरब रही, जबकि वित्त वर्ष 2026 की इसी अवधि में 74.5 अरब लेनदेन हुए थे।
हालांकि, संख्या बढ़ी है, लेकिन वृद्धि दर 23.5 प्रतिशत रही, जो पिछले साल की समान अवधि की 33.5 प्रतिशत वृद्धि से कम है। वित्त वर्ष 2026 में पूरे साल UPI की सालाना वृद्धि करीब 30 प्रतिशत रही थी।
वित्त वर्ष 2025 में यह दर लगभग 41 प्रतिशत थी, जिससे गिरावट साफ दिखाई देती है।
बहस
MDR को लेकर बढ़ी बहस
UPI की धीमी वृद्धि के बीच मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकार ने 2020 से UPI पर शून्य MDR व्यवस्था लागू कर रखी है।
भुगतान कंपनियों और फिनटेक का कहना है कि कमाई का मॉडल नहीं होने से कैशबैक, नए ग्राहक जोड़ने और व्यापारियों तक पहुंच बढ़ाने के लिए निवेश प्रभावित हुआ है।
वहीं कुछ लोग UPI को डिजिटल सार्वजनिक ढांचा मानते हैं और मुफ्त भुगतान व्यवस्था जारी रखने के पक्ष में हैं।
बिल
भविष्य में बड़े भुगतान पर शुल्क संभव
लोकसभा ने 6 अगस्त को कराधान और अन्य कानून (संसोधन) बिल 2026 पास किया, जिससे UPI पर MDR लागू करने का रास्ता खुल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े व्यापारियों के अधिक मूल्य वाले लेनदेन पर 0.25 से 0.30 प्रतिशत तक MDR लगाने की संभावना जताई गई है। हालांकि, अभी अंतिम शुल्क तय नहीं हुआ है।
UPI लेनदेन की कुल रकम की वृद्धि पहले चार महीनों में 20 प्रतिशत रही, जो पिछले वित्त वर्ष की 18.5 प्रतिशत से अधिक है।