भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में 18 फीसदी टैरिफ बना रोड़ा
भारत और अमेरिका के बीच जिस व्यापार समझौते की खूब चर्चा हो रही थी, वह फिलहाल अटक गया है। इसकी वजह यह है कि दोनों देश शुल्कों (टैरिफ) को लेकर एक राय नहीं हो पा रहे हैं।
अमेरिका चाहता है कि आयात शुल्क 18 फीसदी पर ही बने रहें, लेकिन भारत इसे मंजूर करने को तैयार नहीं है।
भले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यह समझौता लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन शुल्कों पर असहमति पूरे समझौते में अड़चन पैदा कर रही है।
अमेरिका की मांग भी पैदा कर रही अड़चन
केवल शुल्कों की बात ही नहीं है, इसमें राजनीति भी हावी है। अमेरिका में जल्द ही मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में वह अपने खास मतदाताओं को खुश करने के लिए कृषि संबंधी रियायतें चाहता है। दूसरी तरफ, भारत यह भरोसा चाहता है कि उसे वियतनाम या बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले आगे चलकर किसी भी तरह की कड़ी पाबंदियों का सामना न करना पड़े।
भारत तो शायद बेहतर और निष्पक्ष शर्तें पाने के लिए चुनावों के बाद तक इंतजार कर सकता है। फिलहाल, इस समझौते से मिलने वाले किसी भी बड़े आर्थिक फायदे पर पानी फिर गया है।