RBI ने रुपये की गिरावट रोकने और सट्टेबाजी पर शिकंजा कसने के लिए सख्त किए नियम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की गिरावट रोकने के लिए दखल दिया है। विदेशी मुद्रा भंडार घटने के कारण रुपया लगातार दबाव में है।
इस स्थिति को संभालने के लिए RBI ने करेंसी ट्रेडिंग से जुड़े नियमों को सख्त किया है। साथ ही, सरकारी तेल कंपनियों के लिए एक खास डॉलर विंडो भी बनाई है, ताकि वे आसानी से डॉलर खरीद सकें। केंद्रीय बैंक का मकसद सट्टेबाजी को रोकना और रुपये की गिरती कीमत को थामना है।
रुपये के डेरिवेटिव्स की दोबारा बुकिंग पर लगाई रोक
सट्टेबाजी वाली ट्रेडिंग पर लगाम लगाने के लिए RBI ने कुछ बड़े कदम उठाए हैं। इसने रद्द किए गए रुपये के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की दोबारा बुकिंग पर रोक लगा दी है। साथ ही, बिना किसी असली कारोबारी जरूरत के लेन-देन की सीमा को 10 करोड़ डॉलर (करीब 950 करोड़ रुपये) से घटाकर केवल 50 लाख डॉलर (करीब 47 करोड़ रुपये) कर दिया गया है।
16 अक्टूबर से बैंकों को रोजाना ज्यादा नकद रिजर्व में रखना होगा। न्यूनतम कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) बनाए रखने की रोजाना की जरूरत 90 से बढ़कर 99 फीसदी हो जाएगी, जबकि कुल CRR में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
इसके अलावा, 13 अक्टूबर को RBI बाजार से तरलता (लिक्विडिटी) कम करने के लिए 250 अरब रुपये के अतिरिक्त ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) बिक्री की योजना बना रहा है।
वित्तीय सर्विस कंपनी नोमुरा ने बताया है कि RBI के ये कदम दिखाते हैं कि वह रुपये को बचाने के लिए कितना गंभीर है, भले ही वैश्विक चुनौतियां बनी रहती हैं तो आगे और भी कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।