अमेरिकी कोर्ट ने एंट्रिक्स के खिलाफ भारतीय स्टार्टअप के पक्ष में अवॉर्ड को बरकरार रखा
अमेरिकी अपील कोर्ट ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की व्यावसायिक शाखा एंट्रिक्स कॉर्प के साथ 2005 में हुई सैटेलाइट डील के फेल होने पर भारतीय स्टार्टअप देवास मल्टीमीडिया को 56.52 करोड़ डॉलर (करीब 5,400 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने के जिला न्यायालय के आदेश की समीक्षा की। कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि 27 अक्टूबर, 2020 का आदेश सही है। अब ब्याज मिलाकर यह मुआवजा 1.2 अरब डॉलर (करीब 115 अरब रुपये) से ज्यादा हो गया है।
न्यायाधीशों ने बताया कि भले ही एंटीरिक्स एक सरकारी कंपनी है, लेकिन फॉरेन सॉवरेन इम्युनिटीज एक्ट (FSIA) में दिए गए आर्बिट्रेशन एक्सेप्शन की वजह से अमेरिकी अदालतों को इस मामले पर सुनवाई का अधिकार मिलता है।
एंट्रिक्स की ट्रांसफर रिक्वेस्ट खारिज
एंट्रिक्स ने यह तर्क दिया कि इस मामले को भारत में ट्रांसफर किया जाए और यह भी दावा किया कि इसका अमेरिका से कोई खास संबंध नहीं है। लेकिन अदालत ने इन तर्कों को नहीं माना और न्यू यॉर्क कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला दिया।
यह सारा घटनाक्रम 2025 में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद सामने आया है, जिसमें यह बताया गया था कि विदेशी सरकार समर्थित कंपनियों पर अमेरिका में कैसे मुकदमा चलाया जा सकता है।
अब जिला न्यायालय को यह तय करना है कि इस मामले में आगे क्या होगा।