UPI लेन-देन पर MDR लगाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
सुप्रीम कोर्ट 28 सितंबर को एक याचिका पर सुनवाई करेगा। यह याचिका सरकार के उस फैसले को चुनौती दे रही है, जिसमें 2,000 रुपये से अधिक के कुछ खास यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) पर्सन-टू-मर्चेंट लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने का प्रावधान है।
याचिका में कहा गया है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले ये नए नियम लोगों की पर्याप्त राय लिए बिना और कानूनी सुरक्षा उपायों के बिना बनाए गए हैं, जो गलत या अन्यायपूर्ण साबित हो सकते हैं।
रुपए डेबिट कार्ड को मिली छूट पर उठाए सवाल
इस नए सिस्टम के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ खास UPI लेन-देन पर 0.4 फीसदी शुल्क देना होगा। यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक हो सकता है।
इसके अलावा, रेलवे और टेलीकॉम जैसे सेक्टर्स को 5 रुपये का एक तय शुल्क लगेगा, वहीं शेयर बाजार से जुड़े सौदों पर केवल 0.02 फीसदी शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा भी 300 रुपये है।
याचिका में यह भी बताया गया है कि रुपए डेबिट कार्ड को इन शुल्कों से छूट मिली हुई है। इससे उन छोटे व्यापारियों को नुकसान हो सकता है, जो अपने कारोबार के लिए UPI पर बहुत ज्यादा निर्भर करते हैं। अदालत से अपील की गई है कि वह फिर से सोचे कि क्या ये बदलाव व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए सचमुच फायदेमंद हैं?