AI को लेकर सतर्कता बरतने के कारण IT कंपनियों की धीमी पड़ी रफ्तार
भारत का IT सेक्टर वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में थोड़ा धीमा पड़ गया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि कंपनियां नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक को अपनाने में सावधानी बरत रही हैं और बड़े फैसले लेने में सामान्य से ज्यादा समय लगा रही हैं।
फिर भी इस सेक्टर में एक आशावादी माहौल है। AI से जुड़े नए सौदे धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। सेंट्रम का अनुमान है कि 2030 तक भारत में AI सर्विस का बाजार 300 से 400 अरब डॉलर (28,500-38,000 अरब रुपये) तक पहुंच सकता है।
मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस और HCL टेक जैसी बड़ी कंपनियां वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में अपने राजस्व में केवल मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही हैं, वहीं विप्रो की कमाई में थोड़ी गिरावट भी आ सकती है।
टीयर-टू कंपनियों में कोफोर्ज का प्रदर्शन सबसे अलग दिख रहा है, जिसकी वृद्धि बाकी कंपनियों से मजबूत रहने का अनुमान है।
इस समय ज्यादातर कॉन्ट्रैक्ट्स का मुख्य ध्यान लागत बचाने पर है, ना कि किसी बड़े और नए प्रोजेक्ट पर। तकनीक और फाइनेंस सेक्टर में खर्च थोड़ा बढ़ा जरूर है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो सेक्टर में अभी भी उतनी तेजी नहीं दिख रही है।