होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों की आवाजाही शुरू होने से गिरे कच्चे तेल के दाम
कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार (24 जून) को गिरावट देखने को मिली। इसकी मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों की आवाजाही का सुधरना है।
सितंबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट फ्यूचर्स 76.11 डॉलर (करीब 7,100 रुपये) प्रति बैरल तक लुढ़क गया, वहीं अगस्त डिलीवरी वाले वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत भी 72.44 डॉलर (करीब 6,800 रुपये) प्रति बैरल पर आ गए।
भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी जुलाई और अगस्त के कच्चे तेल के वायदा सौदों में हल्की नरमी दर्ज की गई।
रोजाना हो रही 60-70 लाख बैरल तेल की आपूर्ति
होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही बढ़ने से अब रोजाना 60 से 70 लाख बैरल तेल वहां से गुजर रहा है। इससे तेल आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं कुछ कम हुई हैं। हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी युद्ध से पहले के स्तर पर नहीं पहुंचा है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश कुछ तेल पाइपलाइनों के रास्ते भेज रहे हैं, फिर भी बाजार में पूरी तरह स्थिरता आने के लिए रोजाना करीब 140 लाख बैरल की आपूर्ति होना जरूरी है।
ट्रंप ने समझौते को लेकर की पुष्टि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पुष्टि की है कि ईरान परमाणु निरिक्षणों के लिए तैयार हो गया है।
इसका सीधा मतलब है कि अब होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी नौसैनिक नाकाबंदी का कोई खतरा नहीं होगा और तेल की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी। इस खबर से तेल की आपूर्ति के बारे में ट्रेडर्स का भरोसा और मजबूत हुआ है, जिसकी वजह से कीमतों में और कमी आई है।