AI चिप की बढ़ती मांग से दक्षिण कोरिया-ताइवान के बाजारों में उछाल, भारतीय बाजार पीछे
दुनियाभर में मेमोरी चिप्स की बहुत ज्यादा मांग है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चलाने के लिए बेहद जरूरी हैं। इसी वजह से दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजार ने पूंजीकरण के मामले में भारत के बाजारों को पीछे छोड़ दिया है।
निवेशक लगातार इन तकनीक प्रधान बाजारों में पैसा लगा रहे हैं, वहीं भारत पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और AI निवेश को लेकर कोई ठोस योजना न होने के कारण पिछडता दिख रहा है।
इन बाजारों में क्या है जोखिम?
फिलहाल, ये दोनों देश AI की बढ़ती मांग का पूरा फायदा उठा रहे हैं। चिप उत्पादन में बढ़ोतरी से इनकी अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिल रही है, लेकिन तकनीक पर उनकी अत्यधिक निर्भरता उन्हें कमजोर भी बना सकती है।
अगर, हालात बदलते हैं तो उनके बाजार खतरे में पड़ सकते हैं। बाजार में सट्टेबाजी काफी ज्यादा है, ऐसे में वैश्विक बॉन्ड यील्ड बढ़ने से आगे चलकर इन बाजारों में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
निवेशकों की सीमित रुचि
भारत में निवेशकों की दिलचस्पी कुछ कम दिख रही है। इसकी वजह यह है कि यहां शेयरों के मूल्यांकन सामान्य स्तर पर आ चुके हैं और AI से जुड़े निवेश के अवसर भी अभी उतने नहीं हैं।
फिर भी, भारत की विविध अर्थव्यवस्था इसे लंबे समय के लिए एक बेहतर संभावना देती है। खासकर, यह विदेशों से चिप निर्माण को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहता है। अगर, ऊर्जा की कीमतें स्थिर होती हैं तो शायद भारत बराबरी कर पाए, लेकिन फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा है।