क्वालकॉम-आर्म के बीच चल रहे मुकदमे पर जूरी फिर करेगी विचार
चिप निर्माता कंपनी क्वालकॉम और आर्म के बीच चल रही कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। इस मामले में जूरी मंगलवार को फिर से विचार-विमर्श करने बैठेगी। इस पूरे मामले की जड़ में यह आरोप है कि आर्म ने लाइसेंसिंग समझौते का उल्लंघन किया है। क्वालकॉम का कहना है कि आर्म ने 2024 में ब्लूमबर्ग को एक गोपनीय पत्र लीक करके मेटा के साथ उसके व्यापार में बाधा डाली। उस पत्र में आर्म ने क्वालकॉम को यह बताया था कि उसने एक महत्वपूर्ण लाइसेंस समझौते का उल्लंघन किया है।
इतना ही नहीं आर्म पर यह भी आरोप है कि उसने क्वालकॉम को अपने डिजाइन के लिए सॉफ्टवेयर पैच और उपकरण देने से भी मना कर दिया। जिस लाइसेंस पर विवाद चल रहा है, वह 2033 तक वैध है।
दोनों कंपनियों के CEOs ने दी गवाही
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई, जब सॉफ्टबैंक ने 2016 में आर्म को खरीद लिया और उसके काम करने के तरीके में बदलाव किए। दिलचस्प बात यह है कि 2024 में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जिसमें आर्म जूरी को यह यकीन नहीं दिला पाई थी कि क्वालकॉम ने उसके साथ हुए लाइसेंस समझौते को तोड़ा है, लेकिन अब दोनों पक्ष फिर से अदालत में आमने-सामने हैं और इस बार उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भी गवाही देने के लिए हाजिर हुए हैं।
आर्म का दावा है कि यह मुकदमा केवल क्वालकॉम की एक चाल है, ताकि लाइसेंस से जुड़ी मुश्किल बातचीत के दौरान उसे फायदा मिल सके। उसने जोर देकर कह रहा है कि कोई वास्तविक नुकसान हुआ ही नहीं है।
दूसरी तरफ, क्वालकॉम चाहती है कि अगर, समझौता टूटा पाया जाता है तो उसे 5 साल तक रॉयल्टी का भुगतान न करना पड़े। हालांकि, आर्म का कहना है कि इसकी अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।