बठिंडा के CUP स्टार्टअप ने पराली से बनाए बर्तन, पर्यावरण के लिए हैं सुरक्षित
बठिंडा की सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब (CUP) में विकसित एक स्टार्टअप की एक टीम ने धान के बचे हुए अवशेषों (पराली) का इस्तेमाल करके मिट्टी में आसानी से घुलने वाले और खाने लायक बर्तन बनाए हैं। इनमें प्लेट, कप और गिलास शामिल हैं।
खास बात यह है कि इन्हें बनाने में किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी के ग्रेजुएट मृगांका साहा इस टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उनका यह प्रोजेक्ट प्लास्टिक का एक शानदार और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प है। ये बर्तन इतने सुरक्षित हैं कि इन्हें जानवर भी खा सकते हैं।
प्लास्टिक का उपयोग होगा कम
CUP में इस पायलट यूनिट को 23 मई को शुरू किया गया था। अनुमान है कि इन बर्तनों को 3.5 रुपये प्रति नग बेचा जा सकता है। इस स्टार्टअप को 8.3 लाख रुपये का फंड मिला है।
यह प्रोजेक्ट स्थानीय किसानों के धान के अवशेषों का उपयोग करता है। इससे पराली जलाने के कारण होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या कम होगी। इसके साथ ही, पंजाब में सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा।