अमेरिका और चीन के AI टूल्स में से भारतीय कंपनियां कौनसे कर रहीं इस्तेमाल?
अमेरिका और चीन के बीच जारी टेक रेस का असर अब इस बात पर साफ दिखने लगा है कि भारतीय कंपनियां अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स किस तरह चुन रही हैं।
अलीबाबा और मूनशॉट AI जैसी चीनी कंपनियां ओपन-वेट मॉडल्स के साथ काफी धूम मचा रही हैं। ये मॉडल्स सस्ते होते हैं और इन्हें खुद होस्ट करना भी आसान है। इससे कंपनियों को डाटा से जुड़े मुश्किल नियमों से बचने में आसानी होती है।
ओपनराउटर पर आधे से ज्यादा ट्रैफिक अब इन्हीं मॉडल्स से आता है और इसकी मुख्य वजह इनकी कम कीमत है। यहां 10 लाख टोकंस के लिए सिर्फ 0.14 से 1.74 डॉलर (करीब 12-150 रुपये) लगते हैं, वहीं अमेरिकी मॉडल्स के लिए यही कीमत 5-30 डॉलर (करीब 450-2,800 रुपये) से भी ऊपर जा सकती है।
कंपनियां अपना रही हैं मिश्रित रणनीति
भारतीय कंपनियां अपनी जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग AI मॉडल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। बैंकिंग या हेल्थकेयर जैसे सख्त नियमों वाले क्षेत्रों में अभी भी अमेरिकी मॉडल्स का ही बोलबाला है क्योंकि उनके कंप्लायंस फीचर्स काफी मजबूत हैं।
दूसरी तरफ, ज्यादा मात्रा में और कम बजट वाले कामों के लिए चीनी ओपन-वेट मॉडल्स पहली पसंद बन गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्विता से ज्यादा इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा टूल असल में बेहतर काम करता है।
उनका साफ कहना है कि लचीलापन और अपनी जरूरत के मुताबिक बदलाव करने की क्षमता सबसे अहम है। कंपनियां किसी एक पक्ष का साथ देने की बजाय वास्तविक नतीजों पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।