कानूनी दांव-पेंच में उलझी टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन की कुर्सी
टाटा संस के बोर्डरूम में इस बात को लेकर थोड़ी खींचतान चल रही है कि एन चंद्रशेखरन को ग्रुप चेयरमैन के तौर पर बनाए रखा जाए या नहीं।
असल मुद्दा है कि आर्टिकल 121 कहता है कि बोर्ड के ज्यादातर सदस्यों द्वारा मंजूर किए गए कुछ फैसलों पर टाटा ट्रस्ट्स के ज्यादातर नॉमिनी की मंजूरी भी जरूरी होती है। हालात तब और बिगड़ गए, जब चेयरमैन के कास्टिंग वोट का इस्तेमाल किया गया।
कानूनी जानकारों ने समझाए वोटिंग नियम
टाटा ट्रस्ट्स ने इस पर आपत्ति की थी कि उनके सभी नॉमिनी की सहमति जरूरी है। इसके बाद टाटा संस ने इस मामले में साफ राय जानने के लिए बड़े कानूनी जानकारों से सलाह ली।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित ने केवल आर्टिकल 104(B) के तहत वोटों की समानता और कास्टिंग वोट का आर्टिकल 121 की शर्त पूरी करना समझाया, जबकि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बीएन श्रीकृष्ण ने कहा कि निदेशकों को सबसे पहले कंपनी के हित के बारे में सोचना चाहिए न कि केवल उन लोगों का प्रतिनिधित्व करना चाहिए, जिन्होंने उन्हें चुना है।
इसके अलावा, कास्टिंग वोट का इस्तेमाल इसलिए किया गया क्योंकि आर्टिकल 104(B) के तहत नियुक्त किए गए निदेशकों के बीच वोटों की समानता थी और इसी ने आर्टिकल 121 की जरूरत को पूरा किया।