भारत में डाटा सेंटर में एक साल में हुआ 57 अरब डॉलर का निवेश
भारत डाटा सेंटर के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया के बड़े देशों में अपनी जगह बना रहा है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों ने एक साल से भी कम समय में लगभग 57 अरब डॉलर (करीब 5,415 अरब रुपये) का निवेश किया है।
यह निवेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। इस साल के आखिर तक भारत की कुल डाटा सेंटर क्षमता 2.6 गीगावाट (GW) तक पहुंचने की उम्मीद है। जून तिमाही के अंत में यह क्षमता 2.1GW थी।
इस साल के बाकी महीनों में इसमें 500 मेगावाट (MW) की और बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
कुल डाटा सेंटर क्षमता में हिस्सेदारी 3 फीसदी
जहां एक तरफ अमेरिका के कई राज्य ऊर्जा और पानी की कमी को लेकर नए डाटा सेंटर बनाने के नियमों को कड़ा कर रहे हैं, वहीं भारत में इन सेंटर्स के लिए निवेश लगातार बढ़ रहा है।
मुंबई इस मामले में सबसे आगे है क्योंकि भारत के 95 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय सबसी (समुद्र के अंदर) केबल ट्रैफिक को यहीं से संभाला जाता है।
इसके अलावा, विशाखापट्टनम, अहमदाबाद और कोच्चि जैसे शहर भी सस्ती जमीन और बिजली की अच्छी उपलब्धता के कारण ज्यादा निवेश अपनी ओर खींच रहे हैं।
हालांकि, अभी भी कुछ चुनौतियां हैं। दुनियाभर में जितना डाटा बनता है, उसमें भारत की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है, लेकिन दुनिया की कुल डाटा सेंटर क्षमता का केवल 3 प्रतिशत ही देश के पास है। भारत के कई सेंटर अभी भी एयर-कूल्ड सिस्टम और पंखे आधारित सेटअप का इस्तेमाल करते हैं।