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टाटा ट्रस्ट्स बनाम टाटा संस बोर्ड, एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति से कैसे बढ़ा विवाद?
एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति से बढ़ा विवाद

टाटा ट्रस्ट्स बनाम टाटा संस बोर्ड, एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति से कैसे बढ़ा विवाद?

Sep 21, 2026
08:41 pm

क्या है खबर?

टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टाटा संस में एन चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाने के फैसले को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के बोर्ड के बीच विवाद बढ़ गया है। 17 सितंबर, 2026 को टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए फिर चेयरमैन बनाने को मंजूरी दी। ट्रस्ट्स ने नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह नियमों के मुताबिक नहीं हुई है और इसे लेकर कानूनी रास्ता अपनाया जा सकता है।

बैठक

17 सितंबर की बैठक में क्या हुआ?

17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड की बैठक में चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाने के प्रस्ताव पर वोटिंग हुई।

इस प्रस्ताव को चार निदेशकों का समर्थन मिला, जबकि टाटा ट्रस्ट्स की ओर से बोर्ड में शामिल नोएल टाटा ने इसका विरोध किया। दूसरे नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया।

उम्मीदवार होने के कारण चंद्रशेखरन खुद प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए। इसके बाद बोर्ड ने पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी दे दी।

हिस्सेदारी

टाटा ट्रस्ट्स के पास कितनी हिस्सेदारी है?

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इसलिए कंपनी के बड़े फैसलों में ट्रस्ट्स की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।

ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस के नियमों के अनुसार चेयरमैन की नियुक्ति के लिए उसके नामित निदेशकों की सहमति जरूरी है।

17 सितंबर की बैठक में नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की नियुक्ति का विरोध किया था, इसलिए ट्रस्ट्स का कहना है कि जरूरी सहमति नहीं मिली है और नियुक्ति गलत है।

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चुनौती

ट्रस्ट्स ने नियुक्ति को क्यों चुनौती दी?

टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि 17 सितंबर की बैठक में चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाने के लिए जरूरी प्रक्रिया नहीं हुई, इसलिए बोर्ड का फैसला वैध नहीं है।

ट्रस्ट्स ने अपने पक्ष में पुराने साइरस मिस्त्री मामले का भी हवाला दिया है। उस मामले में टाटा संस ने सुप्रीम कोर्ट के सामने ट्रस्ट्स की ओर से नामित निदेशकों के अधिकारों का समर्थन किया था।

ट्रस्ट्स का तर्क है कि कंपनी अब उन्हीं नियमों की अलग व्याख्या नहीं कर सकती।

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बयान

12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने क्या कहा था?

इससे पहले अगस्त में चंद्रशेखरन ने टाटा संस के बोर्ड को बताया था कि वह मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद चेयरमैन पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं।

उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म होना है, इसलिए उनके इस फैसले के बाद कंपनी में नए चेयरमैन की तलाश शुरू हो गई थी।

हालांकि, 17 सितंबर को बोर्ड ने उनसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा, जिसके बाद चंद्रशेखरन ने नया कार्यकाल स्वीकार कर लिया।

मुद्दा

टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा भी जुड़ा

टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने का मुद्दा भी चर्चा में है।

बोर्ड ने नए कार्यकाल को मंजूरी देने के साथ कंपनी की लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया है। RBI ने 2022 में टाटा संस को बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी की श्रेणी में रखा था और बाद में कंपनी को इससे बाहर करने की मांग स्वीकार नहीं की गई।

इससे टाटा संस पर लिस्टिंग से जुड़े नियमों का मामला महत्वपूर्ण बना हुआ है।

असर

विवाद का असर टाटा कंपनियों के शेयरों पर

इस विवाद के बीच टाटा ग्रुप की कुछ सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली है।

सोमवार के कारोबार में टाटा कैपिटल का शेयर करीब 3 प्रतिशत नीचे आया, जबकि टाटा पावर में करीब 2.5 प्रतिशत की गिरावट रही। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और टाटा टेक्नोलॉजीज के शेयर भी नीचे कारोबार करते दिखे।

हालांकि, टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों के शेयरों में गिरावट नहीं रही और कुछ कंपनियों के शेयर बाद में बढ़त में कारोबार करते नजर आए।

अन्य

अब मामले में आगे क्या होगा?

अब इस विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति टाटा संस के नियमों के अनुसार हुई है या नहीं।

टाटा ट्रस्ट्स इस फैसले के खिलाफ कानूनी कदम उठा सकता है और राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) का रास्ता भी अपनाया जा सकता है। दूसरी ओर, टाटा संस का बोर्ड अपने फैसले पर कायम है।

आगे की प्रक्रिया से चेयरमैन के कार्यकाल, टाटा संस की लिस्टिंग और ट्रस्ट्स-बोर्ड के संबंधों पर असर पड़ सकता है।

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