कच्चे तेल में उछाल और RBI के कड़े बयानों से सरकारी बॉन्डों में आई गिरावट
बुधवार (14 अक्टूबर) को भारतीय सरकारी बॉन्डों में गिरावट दर्ज की गई। इसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर संजय मल्होत्रा का ब्याज दरों पर कड़ा रुख दिखाना था।
बाजार में यह चिंता साफ दिखी कि लागत बढ़ रही है और केंद्रीय बैंक महंगाई रोकने पर पूरा ध्यान दे रहा है। इसी वजह से बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड बढ़कर 7.3886 फीसदी पर पहुंच गई।
कच्चा तेल 107 डॉलर के करीब पहुंचा
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 107 डॉलर (करीब 10,150 रुपये) प्रति बैरल के आस-पास पहुंच गईं। इससे भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों पर भारी दबाव आया है, जिससे महंगाई बढ़ने और रुपये की कीमत गिरने का डर है। सितंबर में उपभोक्ता महंगाई 5.54 फीसदी थी और अब अक्टूबर में इसके केंद्रीय बैंक की तय सीमा को पार करने का अनुमान है। ऐसे में RBI द्वारा एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की निगाहें दुनियाभर के आर्थिक रुझानों और इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे क्या कदम उठाता है?