मयंक यादव की 150 किलोमीटर प्रति घंटे रफ्तार भारत के लिए कैसे है फायदे का सौदा?
क्या है खबर?
श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टी-20 टीम लगातार अच्छा कर रही है। आयरलैंड के खिलाफ 2-0 और इंग्लैंड के खिलाफ 4-0 से सीरीज गंवाने के बाद भारत ने पिछले 11 में से 10 मुकाबले जीते हैं। इस दौरान जसप्रीत बुमराह टीम का हिस्सा नहीं रहे। उनकी गैरमौजूदगी में मयंक यादव ने प्रभावित किया। जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ 6 स्पेल में मयंक ने 22 ओवर में 182 रन देकर 9 विकेट झटके हैं। उनका इकॉनमी रेट 8.27 रहा है।
रफ्तार
मयंक भारत की इस कमी को कर रहे दूर
मयंक की 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार भारतीय टी-20 टीम के लिए अहम साबित हो सकती है।
भारत को लंबे समय से ऐसे गेंदबाज की जरूरत रही है जो अपनी गति से बल्लेबाजों को बैकफुट पर धकेल सके।
जोफ्रा आर्चर, मार्क वुड और एनरिक नॉर्किया जैसे गेंदबाज अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को मुश्किल में डालते हैं।
अगर मयंक फिटनेस बनाए रखते हुए गेंदबाजी में नियंत्रण हासिल कर लेते हैं तो वह भारत के लिए बड़ा हथियार बन सकते हैं।
खतरनाक
क्यों खतरनाक साबित हो रहे मयंक?
मयंक की 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार बल्लेबाजों को संभलने का ज्यादा मौका नहीं देती।
इतनी तेज गति से गेंद पड़ने के बाद आखिरी समय में दिशा बदले या अच्छी लेंथ से उछाल ले, तो रक्षात्मक शॉट खेलने पर भी बल्ले का किनारा लग सकता है।
हालांकि, बल्लेबाज गेंद की लाइन और लेंथ का पहले ही अंदाजा लगा लें तो मयंक की इसी रफ्तार का इस्तेमाल उनके खिलाफ भी कर सकते हैं।
चोट
चोट ने मयंक को किया काफी परेशान
मयंक के लिए मैदान पर वापसी के साथ-साथ चोटों से उबरना भी बड़ी चुनौती रहा। उनके कोच देवेंद्र शर्मा ने बताया कि बार-बार चोटिल होने के बाद जांच में उनकी पीठ की चोट का पता चला।
इसके बाद उनके सामने सर्जरी कराने या नहीं कराने का फैसला लेने की चुनौती थी।
उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "वापसी का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा क्योंकि उन्हें बार-बार चोट लग रही थी और बाद में पता चला कि उनकी पीठ में दिक्कत है।"
परेशान
मयंक को चोट से उबरने में 4 से 5 महीने लगे
मयंक को चोट से उबरने और वापसी की प्रक्रिया पूरी करने में 4 से 5 महीने का समय लग गया। उनके कोच ने बताया कि मयंक के मन में हर दिन यह सवाल उठता था कि क्या वह दोबारा क्रिकेट खेल पाएंगे?
उन्होंने कहा, "हर दिन यही उसका यही सवाल रहता था कि क्या मैं फिर से खेल पाऊंगा? मांसपेशियों को मजबूत करने में काफी समय लगता है।"
इसके बाद उनको धीरे-धीरे अपनी ताकत और फिटनेस दोबारा हासिल करनी पड़ी।
कोच
ऐसे लौटा मयंक का आत्मविश्वास
कोच शर्मा ने बताया कि मयंक अपनी प्रगति पर चर्चा करने के लिए दिल्ली स्थित उनके क्लब में आते रहते थे, लेकिन चोट से उबरने के लिए जरूरी विशेष मशीनें बेंगलुरु स्थित COE में उपलब्ध थीं।
IPL टीम द्वारा रिटेन करने के लिए उनका आकलन किए जाने तक मयंक वहां रोजाना 10 से 15 ओवर गेंदबाजी करने लगे थे।
उन्होंने कहा, "जब उनकी गेंदबाजी की रफ्तार लगभग 125 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंची तो धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास लौटने लगा।"
विश्व कप
भारत को चाहिए भरोसेमंद गेंदबाज
2028 का टी-20 विश्व कप ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में खेला जाना है। ऐसे में भारत के पास बुमराह के अलावा तेज गेंदबाजी के दूसरे विकल्प तैयार करने का समय है।
मयंक के पास रफ्तार है, जबकि प्रिंस यादव गेंद को स्विंग कराने और नियंत्रण के साथ गेंदबाजी करने में सक्षम हैं।
दोनों को फिटनेस बनाए रखने, अतिरिक्त रन देने से बचने और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने पर ध्यान देना होगा।
भारत को दूसरे बुमराह नहीं, बल्कि भरोसेमंद गेंदबाज चाहिए।