श्रीधर वेंबु ने की अमीरी-गरीबी की खाई पाटने के लिए टेक्नोलॉजी बांटने की वकालत
जोहो के संस्थापक श्रीधर वेंबु ने दुनियाभर में टेक्नोलॉजी फिर से साझा करने की वकालत की है। उनका मानना है कि ऐसा करने से अमीर और गरीब देशों के बीच की खाई कम हो सकती है।
उन्होंने याद दिलाया कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद कई देश एक-दूसरे की तरक्की में मदद करने के लिए साथ आए थे, लेकिन 1990 के दशक के बाद से बौद्धिक संपदा के कड़े कानूनों ने गरीब देशों को और ज्यादा निर्भर बना दिया और उन्हें कर्ज में धकेल दिया।
वेंबु इसे 'वैश्वीकरण की मौत' बताते हैं और भारत से आगे बढ़कर ऐसी भूमिका निभाने का आग्रह करते हैं, जिससे टेक्नोलॉजी सभी के लिए सुलभ हो जाए।
चीन के AI मॉडल का किया जिक्र
वेंबु का सुझाव है कि भारत, चीन की तरह ही अपनी एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक साझा करके अपना प्रभाव बढ़ा सकता है। ऐसा करने से भारत न केवल नवाचार के वैश्विक नक्शे पर अपनी जगह बनाएगा, बल्कि यह विकासशील देशों को सहारा देने के भारत के 'विश्वगुरु' बनने के सपने से भी जुड़ता है।
उन्होंने चेन्नई में बनी इंटीग्रल कोच फैक्टरी का उदाहरण भी दिया। इसे स्विस विशेषज्ञता की मदद से बनाया गया था, जो दिखाता है कि जब हम ज्ञान साझा करते हैं तो देश दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी खुद की क्षमताएं विकसित कर पाते हैं।