AI और SIFs के कारण भारत के निवेश बाजार में आ रहे बदलाव पर चर्चा
इंडियन इंस्टीट्यूशनल क्वांट कॉन्फ्रेंस (IIQC) का छठा संस्करण हाल ही में गुरूग्राम में संपन्न हुआ, जिसमें इस बात पर रोशनी डाली गई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑल्टरनेटिव डाटा और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) किस तरह भारत के निवेश बाजार को बदल रहे हैं।
इस इवेंट में दुनियाभर के विशेषज्ञ एक मंच पर इकट्ठा हुए, जिन्होंने क्वांटिटेटिव इन्वेस्टिंग के नए रुझानों पर बातचीत की।
पैनलों में एजेंटिक AI पर चर्चा
प्रोफेसर मिकेल नोगुएर अलोंसो ने बताया कि एजेंटिक AI पोर्टफोलियो मैनेजमेंट और ट्रेडिंग के तरीके में बड़ा बदलाव ला सकता है।
LSEG और S&P ग्लोबल के प्रतिनिधियों ने पैनल चर्चाओं में गहराई से बताया कि भारत में AI और नए तरह के डाटा का इस्तेमाल कैसे हो रहा है और कौन-सी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
एक और अहम बात ये सामने आई कि SIFs अब अति-धनी निवेशकों और फैमिली ऑफिस के लिए एक खास पसंद बन रहे हैं। ये वे निवेशक हैं जो ज्यादा संरचित निवेश रणनीतियों की तलाश में रहते हैं।
इस कॉन्फ्रेंस में LAQSA के सह संस्थापक ऋषि कोहली, पंकज मणि और अरविंद माथुर, प्रोफेसर चेतन घटे और सुनील रामराखियानी जैसे बड़े नाम शामिल हुए।