भारत में सेमीकंडक्टर को बढ़ावा देने के लिए खास प्रतिभाओं की कमी
भारत सेमीकंडक्टर निर्माण में एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है, लेकिन सेमीकॉन इंडिया 2026 में जानकारों का कहना था कि देश को नई प्रतिभाओं की जरूरत है।
इसके लिए केवल पारंपरिक भूमिकाओं वाले लोग ही नहीं, बल्कि प्रोसेस इंजीनियर और क्लीन रूम टेक्नीशियन जैसी नई प्रतिभाओं की भी दरकार है।
प्रोफेसर मनोज चौधरी ने बताया कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) के तहत स्थानीय विशेषज्ञता बनाने से भारत विदेशी ट्रेनिंग पर अपनी निर्भरता कम कर पाएगा।
ब्रिज कोर्स और व्यावहारिक प्रशिक्षण का सुझाव
विशेषज्ञों ने कहा कि यूनिवर्सिटी और उद्योग के बीच सहयोग से ही कौशल की कमी को पूरा किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्लासरूम में जो पढ़ाया जाता है और उद्योग में जिस कौशल की जरूरत होती है, उसमें काफी फर्क है।
उन्होंने ब्रिज कोर्स और व्यावहारिक प्रशिक्षण का सुझाव दिया। प्रोफेसर सेल्वराजा ने कहा, "जो बेसिक टेक्निकल चीजें कॉलेज में सिखाई जाती हैं और फैक्टरी के फ्लोर पर काम करने के लिए जिनकी जरूरत होती है, वे अक्सर एक जैसी नहीं होतीं।
ऐसे में सवाल उठता है कि एक ऐसा पाठ्यक्रम कैसे बनाया जाए, जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो?" उन्होंने आगे कहा, "इसी सोच के साथ हमें लगा कि नए कर्मचारियों को जल्दी से काम सिखाने के लिए हमें शायद एक ब्रिज कोर्स की जरूरत पड़ेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि उद्योग के साथ मिलकर उनकी जरूरतों के हिसाब से ही कोर्स तैयार किए जाएं।"