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एक जैसी सैलरी, फिर भी क्यों अलग मिलता है पर्सनल लोन? जानिए वजह
बैंक कई दूसरे वित्तीय पहलुओं की भी विस्तार से जांच करते हैं

एक जैसी सैलरी, फिर भी क्यों अलग मिलता है पर्सनल लोन? जानिए वजह

Aug 06, 2026
05:32 pm

क्या है खबर?

अक्सर देखा जाता है कि दो लोगों की महीने की सैलरी, शहर और लोन की रकम एक जैसी होने के बाद भी बैंक दोनों को अलग-अलग फैसला सुनाते हैं। किसी का लोन जल्दी मंजूर हो जाता है, जबकि किसी को कम रकम, ज्यादा ब्याज या आवेदन खारिज होने का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह केवल सैलरी नहीं होती, बल्कि बैंक कई दूसरे वित्तीय पहलुओं की भी विस्तार से जांच करते हैं।

#1

क्रेडिट स्कोर और पुराना रिकॉर्ड सबसे अहम

लोन आवेदन के समय बैंक सबसे पहले आवेदक का क्रेडिट स्कोर और पुराने लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान रिकॉर्ड देखते हैं।

जिसने हमेशा समय पर EMI और बिल चुकाए हैं, उसे कम जोखिम वाला ग्राहक माना जाता है। ऐसे लोगों को बेहतर ब्याज दर और ज्यादा लोन मिलने की संभावना रहती है।

वहीं, पहले भुगतान में देरी या चूक करने वालों के आवेदन पर बैंक ज्यादा सावधानी से फैसला लेते हैं।

#2

मौजूदा EMI और नौकरी भी करती है असर

बैंक यह भी देखते हैं कि आपकी आय का कितना हिस्सा पहले से किसी दूसरे लोन की EMI में जा रहा है।

अगर पहले से ज्यादा मासिक किस्त चल रही है, तो नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, नौकरी की स्थिरता भी अहम होती है।

लंबे समय से एक ही संस्था में काम करने वाले, सरकारी कर्मचारी और बड़ी कंपनियों के कर्मचारियों को अक्सर ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।

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#3

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी पड़ता है भारी

लोन मंजूरी के दौरान बैंक आपके क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर भी ध्यान देते हैं।

आप अपनी तय क्रेडिट सीमा का बहुत बड़ा हिस्सा लगातार इस्तेमाल करते हैं, तो इसे वित्तीय दबाव का संकेत माना जा सकता है। कम क्रेडिट उपयोग बेहतर वित्तीय अनुशासन दिखाता है।

इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि समय पर भुगतान करें, कम कर्ज रखें और अच्छा क्रेडिट रिकॉर्ड बनाए रखें, ताकि लोन मिलने की संभावना बढ़ सके।

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