रेड बुल ने एनर्जी शब्द पर प्रतिबंध लगाने के आदेश को कोर्ट में दी चुनौती
रेड बुल ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को कोर्ट में चुनौती दी है। दरअसल, FSSAI ने रेड बुल को 1 जुलाई से 90 दिनों के भीतर अपने उत्पाद के लेबल, मार्केटिंग और विज्ञापनों से 'एनर्जी' शब्द हटाने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि यह शब्द लगभग 29 सितंबर तक हटाना होगा।
यह आदेश केवल रेड बुल के लिए ही नहीं है, बल्कि स्टिंग और मॉन्स्टर जैसे दूसरे ड्रिंक्स पर भी लागू होता है। FSSAI का तर्क है कि एनर्जी ड्रिंक की कोई साफ परिभाषा तय नहीं है और इस शब्द के इस्तेमाल से लोगों को गलत जानकारी मिल सकती है।
कंपनियों को बात रखने का मौका नहीं देने पर उठाए सवाल
हाई कोर्ट ने इस मामले पर सवाल उठाया है कि क्या रेड बुल को बैन से पहले अपनी बात रखने का मौका दिया गया था।
उधर, ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों को डर है कि अगर, उन्हें अपने उत्पाद को कैफीन युक्त पेय कहना पड़ा तो इससे ग्राहकों के बीच और ज्यादा भ्रम पैदा होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि कॉफी से लेकर सॉफ्ट ड्रिंक्स तक बहुत से पेय इस श्रेणी में आ सकते हैं।
पैप्सिको जैसी बड़ी कंपनियां पहले ही अपने लेबल बदल रही हैं, लेकिन इंडियन बेवरेज एसोसिएशन चाहता है कि इस तरह के बड़े फैसले लेने से पहले नियामक कंपनियों के साथ बैठकर बात करें।