अब हर 3 महीने में बदलेगी आपकी EMI, RBI ने दिया प्रस्ताव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकों द्वारा फ्लोटिंग-रेट लोन पर ब्याज दरें तय करने के तरीके में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है।
RBI ने प्रस्ताव दिया है कि बैंक फंड्स की मार्जिनल कॉस्ट पर आधारित लेंडिंग रेट (MCLR) के मार्जिनल कॉस्ट वाले हिस्से की गणना 3 महीने के औसत के आधार पर करें।
इसके साथ ही, यह भी सुझाव दिया गया है कि MCLR से जुड़े लोन की रीसेट अवधि 3 महीने से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
इन बदलावों से आपके EMI में बाजार के उतार-चढ़ाव जल्दी दिखाई देंगे, जिससे कर्ज लेना और उसे समझना ज्यादा आसान और पारदर्शी बन जाएगा।
कब लागू होंगे प्रस्तावित निर्देश?
अगर, ये नियम मंजूर हो जाते हैं तो बैंकों को लोन की ब्याज दरों में 'रिस्क' और 'ऑपरेटिंग कॉस्ट' जोड़ने के लिए एक मानक तरीका अपनाना होगा।
RBI के प्रस्तावित दिशा-निर्देश 1 अप्रैल, 2027 से लागू होंगे, वहीं जो पुराने लोन पहले से ही आंतरिक या बाहरी बेंचमार्क से जुड़े हैं, उन्हें 1 अप्रैल, 2029 तक नए ब्याज दर ढांचे में बदलना होगा। केंद्रीय बैंक ने इन ड्राफ्ट नियमों पर लोगों से प्रतिक्रिया मांगी है।