भारत में कॉर्पोरेट मांग से कोवर्किंग निवेश को मिला बढ़ावा
भारत में कोवर्किंग स्पेस का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी कंपनियां इस वक्त 72 फीसदी मैनेज्ड वर्कस्पेस सीटों का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे इस सेक्टर में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है।
इसकी बड़ी वजह ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) हैं, जिनकी मांग आधे से भी ज्यादा है। फ्लेक्सिबल ऑफिस उन बिजनेस के लिए खूब पसंद किए जा रहे हैं, जो बिना किसी लंबे-चौड़े समझौते के अपनी जरूरत के मुताबिक ऑफिस की जगह को घटा या बढ़ा सकते हैं।
24 फीसदी ऑफिस स्पेस किराए पर लिया
इस साल की पहली छमाही में ही कोवर्किंग ऑपरेटर्स ने देश के 8 बड़े शहरों में कुल 24 फीसदी ऑफिस स्पेस किराए पर लिया है। यह आंकड़ा करीब 1.15 करोड़ वर्ग फीट जगह के बराबर है।
2016 से लेकर अब तक इस सेक्टर में लगभग 94.60 करोड़ डॉलर (करीब 8,900 करोड़ रुपये) का प्राइवेट इक्विटी निवेश हो चुका है और इस साल भी यह निवेश लगातार बढ़ता जा रहा है।
वीवर्क इंडिया और स्मार्टवर्क्स जैसी कंपनियों के शेयर बाजार में लिस्ट होने से फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ने अब साफ कर दिया है कि भारत में लोग कैसे और कहां काम करेंगे।