LPG की किल्लत के बाद चर्चा में आई वायु बायोगास, पुणे की कंपनी बना रही
तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की किल्लत और बढ़ती कीमत के बीच पुणे की प्रियदर्शन सहस्रबुद्धे 'वायु बायोगास' एक बार फिर चर्चाओं में आ गई है। 2019 में शुरू हुआ उसका यह सिस्टम लोगों को रसोई के बचे हुए कचरे को खाना पकाने वाली गैस में बदलने का आसान तरीका सिखाता है।
उनके छोटे और आसान सिस्टम अब कुल 450 जगहों पर लग चुके हैं। इनमें से ज्यादातर सिस्टम पुणे और उसके आस-पास हैं, वहीं कुछ उत्तराखंड और विशाखापट्टनम में भी काम कर रहे हैं। पारंपरिक LPG के मुकाबले ये सिस्टम पर्यावरण के लिए बेहतर और किफायती विकल्प पेश करते हैं।
LPG की कमी के बाद बढ़े ऑर्डर
मार्च में पूरे भारत में LPG की किल्लत हुई, जिसके बाद वायु बायोगास में लोगों की दिलचस्पी अचानक बहुत बढ़ गई। सिर्फ पुणे से ही करीब 200 ऑर्डर मिले, वहीं 1,500 से ज्यादा लोगों ने उनसे संपर्क साधा।
यह स्टार्टअप कचरा बीनने वालों के उत्थान में भी जुटा है। उन्होंने 50 कचरा बीनने वालों और स्वच्छ संस्थान के सदस्यों के घरों में अपने यूनिट लगाए हैं।
प्रियदर्शन का कहना हैं कि 2019 से अब तक उन्होंने काफी LPG सिलेंडर बचा लिए हैं। उसका लक्ष्य है कि वह पूरे भारत में अपना काम बढ़ाएं और एक ऐसा समुदाय बनाएं, जो समझदार और टिकाऊ जीवन शैली अपनाए।