पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड, तुरंत पैसे की जरूरत में कौन-सा विकल्प सही?
क्या है खबर?
जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो लोग अक्सर क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन में से किसी एक विकल्प पर विचार करते हैं। दोनों ही आसान और जल्दी मिलने वाले साधन हैं, लेकिन इनके नियम और खर्च अलग होते हैं। असली फर्क सिर्फ ब्याज दर का नहीं, बल्कि इस बात का है कि भुगतान कैसे करना है और कर्ज कितने समय तक चलेगा। सही विकल्प आपकी जरूरत और चुकाने की क्षमता पर निर्भर करता है।
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क्रेडिट कार्ड: आसान लेकिन महंगा विकल्प
क्रेडिट कार्ड छोटे और कम समय के खर्च के लिए बेहतर माना जाता है। अगर आप पूरा बिल समय पर चुका देते हैं तो ब्याज नहीं देना पड़ता। लेकिन बकाया राशि आगे बढ़ाने पर ब्याज दर 30 से 40 प्रतिशत सालाना तक पहुंच सकती है। ब्याज रोजाना के आधार पर जुड़ता है और कंपाउंड होता रहता है। केवल न्यूनतम भुगतान करने से कर्ज लंबा खिंच सकता है और कुल भुगतान काफी बढ़ जाता है।
#2
पर्सनल लोन: तय समय और EMI की सुविधा
पर्सनल लोन एक तय रकम और तय अवधि के लिए लिया जाता है। इसमें हर महीने निश्चित EMI चुकानी होती है, जिससे भुगतान की योजना साफ रहती है। ब्याज दर आमतौर पर क्रेडिट कार्ड से कम होती है। हर EMI में मूलधन और ब्याज दोनों कम होते जाते हैं। इससे कर्ज निश्चित समय पर खत्म हो जाता है। हालांकि, समय पर EMI न चुकाने पर क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ सकता है।
#3
किस स्थिति में कौन सा विकल्प बेहतर
अगर रकम कम है और आप एक-दो महीने में चुका सकते हैं तो क्रेडिट कार्ड सही हो सकता है। हालांकि, अगर आपको रकम का भुगतान करने में ज्यादा समय लगने वाला है, तो पर्सनल लोन आमतौर पर सस्ता और कम तनाव वाला विकल्प होता है। लंबे समय तक क्रेडिट कार्ड का बकाया रखना महंगा साबित हो सकता है। इसलिए जरूरत, समय और भुगतान क्षमता को समझकर ही फैसला लेना समझदारी है।