अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में गिरावट
क्या है खबर?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हमलों पर दो हफ्ते की रोक लगाने के फैसले का सीधा असर बाजार पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड 109.77 डॉलर से गिरकर 95.06 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं WTI क्रूड भी करीब 20 डॉलर गिरकर लगभग 94 डॉलर के आसपास पहुंच गया, जिससे निवेशकों को काफी राहत मिली।
होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से सप्लाई में सुधार
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की उम्मीद मानी जा रही है। यह दुनिया का बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस रोज गुजरती है। तनाव के कारण यहां से आवाजाही लगभग रुक गई थी। अब टैंकरों के फिर से चलने की संभावना बढ़ने से सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद जगी है, जिससे बाजार में डर कम हुआ और कीमतों में तेजी से गिरावट आई।
कीमतें
पहले तेजी से बढ़ी थीं तेल की कीमतें
फरवरी के अंत से अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस अहम रास्ते को बंद करने की कोशिश की थी। इससे वैश्विक सप्लाई को लेकर डर काफी बढ़ गया था। मार्च में तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई थीं, जो एक रिकॉर्ड उछाल था। टैंकरों का बीमा महंगा हो गया और कई जहाजों ने इस रास्ते से दूरी बना ली, जिससे बाजार में भारी अस्थिरता और चिंता देखने को मिली।
असर
शेयर बाजार और करेंसी में दिखा सकारात्मक असर
तेल की कीमतों में गिरावट के साथ ही बाजार के अन्य हिस्सों में भी सकारात्मक असर देखने को मिला है। S&P 500 फ्यूचर्स 2 प्रतिशत से ज्यादा बढ़े, जबकि अमेरिकी 10 साल के बॉन्ड फ्यूचर्स करीब 15 टिक ऊपर गए। ऑस्ट्रेलियन डॉलर 1.3 प्रतिशत और यूरो 0.76 प्रतिशत मजबूत हुआ। इसके अलावा, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी तेजी देखने को मिली, जिससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे वापस लौट रहा है।
अनिश्चितता
फिलहाल राहत, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
यह राहत अभी सिर्फ दो हफ्तों के लिए है और इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय के शांति समझौते पर बातचीत जारी है। अगर यह बातचीत सफल नहीं होती, तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं और कीमतों में दोबारा उछाल आ सकता है। फिलहाल बाजार उम्मीद कर रहा है कि स्थिति बेहतर होगी, लेकिन आगे की दिशा पूरी तरह आने वाले फैसलों पर निर्भर करेगी।