UPI पर MDR लागू होने से 15,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व मिलने का अनुमान
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू कर दिया है।
इसका सीधा मतलब यह है कि जब आप UPI का इस्तेमाल करेंगे तो बड़े कारोबारियों को अब एक छोटा-सा शुल्क चुकाना पड़ेगा। हालांकि, रोजमर्रा के आम यूजर्स और छोटे भुगतान पर इसका कोई असर नहीं होगा, वे पहले की तरह ही फ्री रहेंगे।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब महामारी के बाद UPI की जबरदस्त बढ़ोतरी थोड़ी धीमी हुई है। इसका लक्ष्य डिजिटल भुगतान को लगातार बढ़ावा देना है, ताकि आम ग्राहकों को किसी तरह की दिक्कत न हो।
बड़ी कंपनियाें पर होगा ज्यादा असर
ज्यादातर नए शुल्क उन बड़ी कंपनियों से वसूल किए जाएंगे, जिनकी सालाना कमाई 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। ऐसे में आपके चाय वाले या किराना स्टोर को इससे कोई परेशानी नहीं होगी। ग्राहकों की सहूलियत के लिए 2,000 रुपये तक के भुगतानों को इस नियम से बाहर रखा गया है।
NPCI को उम्मीद है कि पहले साल में इससे करीब 13,000 से 15,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। इस राशि का कुछ हिस्सा छोटे व्यापारियों की मदद करने और भारत के डिजिटल भुगतान सिस्टम को और बेहतर बनाने पर खर्च किया जाएगा।