NCLT ने सुभाष चंद्रा मामले में CBI से मांगा जवाब
राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से 4 सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है।
बेंच की कमी के कारण सुनवाई को कुछ समय के लिए टाल दिया गया। 5 सदस्यों वाली बेंच ने कहा कि CBI की जांच का इस केस पर असर पड़ सकता है। हालांकि, चंद्रा की तरफ से एजेंसी को पार्टी बनाने पर आपत्ति जताई गई। बेंच ने यह भी कहा कि इस मामले की मौजूदा रूप में सुनवाई से NCLT के कामकाज पर असर पड़ सकता है और सभी पक्षों से अगली तारीख से पहले जवाब दाखिल करने को कहा।
चंद्रा ने दिया 6.5 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
CBI ने अगस्त में LIC हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत पर चंद्रा के खिलाफ FIR दर्ज की। शिकायत में 1,322 करोड़ रुपये के गलत नुकसान का आरोप लगाया गया था। यह भी इस मामले में एक कर्ज देने वाली संस्था है।
अधिकारियों ने बताया है कि लगभग 2,574 करोड़ रुपये के दावे उन लोन से जुड़े हैं, जिनकी गारंटी चंद्रा ने व्यक्तिगत रूप से दी थी। इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 95 के तहत इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की ओर से दायर इस मामले में 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावे शामिल हैं।
चंद्र का कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पैसे उधार नहीं लिए थे और उनकी योजना उनकी अपनी 31.79 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति पर आधारित थी। उन्होंने लेनदारों को 6.25 करोड़ रुपये और दिवालियापन की प्रक्रिया के खर्च के लिए 25 लाख रुपये देने का प्रस्ताव रखा।
बड़े बैंक अभी भी इस प्रस्ताव से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। इसी दौरान, ट्रिब्यूनल ने उन्हें अपनी कोई भी संपत्ति सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से बेचने या किसी और के नाम ट्रांसफर करने से रोक दिया है।