भारत का चिप बाजार 2031 में करीब 14,000 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान
कोटक महिंद्रा म्युचुअल फंड की एक रिपोर्ट बताती है कि 2031 तक भारत का चिप मार्केट 155 अरब डॉलर (करीब 14,000 अरब रुपये) तक पहुंच जाएगा।
इसमें हर साल 20 फीसदी की तेज रफ्तार से बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक चिप उपयोग में भारत की हिस्सेदारी 2026 के 6 फीसदी से बढ़कर 2031 तक 9 फीसदी हो सकती है। बढ़ती मांग और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश इसके मुख्य कारण हैं।
उपकरणों और कच्चे माल के आयात पर निर्भर
दुनियाभर के कुल 3 लाख चिप डिजाइनर्स में से लगभग 20 फीसदी भारत में ही हैं, जो यहां की बड़ी क्षमता को दिखाता है। सरकार के 'चिप-टू-स्टार्टअप' जैसे प्रोग्राम और माइक्रोन, टाटा, कायनेस और सीजी सेमी जैसी कंपनियों के प्रोजेक्ट्स से भारत के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग इकोसिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
खास बात यह है कि भारत में चिप्स की असेंबलिंग बाकी देशों के मुकाबले 30 फीसदी तक कम लागत में की जा सकती है। हालांकि, इसमें एक बड़ी चुनौती भी है। भारत अभी भी चिप बनाने के उपकरणों और कच्चे माल के लिए आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है। यह सेमीकंडक्टर्स में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को धीमा कर सकता है।