येन की गिरावट रोकने के लिए जापान-अमेरिका ने उठाया बड़ा कदम
जापान और अमेरिका ने 2011 के बाद पहली बार मिलकर येन की लगातार हो रही गिरावट को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। यह फैसला शुक्रवार (31 जुलाई) को लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि मुद्रा बाजार में हो रही अत्यधिक उथल-पुथल को नियंत्रित करने के लिए यह जरूरी था। दोनों देशों की सरकारें यह भी कह रही हैं कि अगर, फिर से जरूरत पड़ी तो वे दोबारा हस्तक्षेप करने के लिए तैयार हैं, ताकि वैश्विक बाजार स्थिर बने रह सकें।
डॉलर 156.50 के स्तर पर फिसला
इस कदम के बाद डॉलर, येन के मुकाबले 0.6 फीसदी गिर गया और एशियाई ट्रेडिंग घंटों के दौरान 156.50 के स्तर पर आ गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समाधान ज्यादा समय तक नहीं टिकेगा। इसकी वजह यह है कि ऊर्जा की बढ़ती लागत, जापान और अमेरिका के बीच ब्याज दरों में बड़ा अंतर जैसी मुख्य चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। इससे पहले जापान की ओर से जून में ब्याज दरों में की गई भारी बढ़ोतरी से भी सिर्फ कुछ समय के लिए ही राहत मिली थी। आगे चलकर अगर, हालात फिर से खराब होते हैं तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी या फेडरल रिजर्व की 'रिपर्चेज फैसिलिटी' जैसे नए उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है।