LIC पॉलिसी बंद कर म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना सही या गलत? जान लें फायदे-नुकसान
क्या है खबर?
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की बीमा पॉलिसियां लंबे समय से निवेशकों के बीच भरोसेमंद विकल्प रहा है। सुरक्षा के साथ निश्चित रिटर्न और टैक्स छूट के कारण इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। अब बाजार में म्यूचुअल फंड जैसे ज्यादा रिटर्न देने वाले विकल्प आने से निवेशक उनकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं। कई निवेशक यह सोचते हैं कि LIC पॉलिसी सरेंडर कर म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाए। आइये जानते हैं यह फैसला लेना सही है या गलत।
LIC
LIC पॉलिसी के क्या-क्या हैं फायदे?
LIC पॉलिसी निवेशकों को सुरक्षा, तय रिटर्न, टैक्स छूट और मैच्योरिटी पर टैक्स-फ्री रकम देती है। इसी कारण यह पसंदीदा विकल्प है। इस सुरक्षा की कीमत उन्हें कम रिटर्न के रूप में चुकानी पड़ती है। लंबे समय बाद, जो रिटर्न मिलता है, वो महंगाई के हिसाब से पर्याप्त नहीं होता। मैच्योरिटी से पहले पॉलिसी बंद करने पर सरेंडर वैल्यू मिलती है। इसमें से कई तरह के चार्ज काट लिए जाते हैं, जिससे निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है।
म्यूचुअल फंड
म्यूचुअल फंड की क्या है खासियत?
म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़े होने के कारण लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न की संभावना रखते हैं। इनमें निवेशक को बेहतर लिक्विडिटी मिलती है, क्योंकि जरूरत पड़ने पर यूनिट्स को आसानी से भुनाया जा सकता है। बीमा की तुलना में म्यूचुअल फंड का लॉक-इन पीरियड कम होता है। जहां LIC में रिटर्न तय होते हैं, वहीं म्यूचुअल फंड में कोई गारंटी नहीं होती। इसमें मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है, जबकि LIC में मैच्योरिटी राशि टैक्स-फ्री होती है।
चयन
इस आधार पर करें निर्णय
जानकारों की मानें तो बीमा और निवेश को अलग-अलग रखना बेहतर होता है। जीवन सुरक्षा के लिए टर्म इंश्योरेंस सस्ता और प्रभावी विकल्प है, जबकि म्यूचुअल फंड लंबे समय में अच्छा रिटर्न देने में मदद करते हैं। अगर, आपने सिर्फ बचत या निवेश के लिए LIC कराई है और बीमा पहले से ले रखा है तो निवेश के दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। LIC सरेंडर करने से पहले रिटर्न, नुकसान, जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी है।