इंडसइंड बैंक प्रमुख को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए काटने पड़ रहे चक्कर
इंडसइंड बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राजीव आनंद वोटर लिस्ट में उनका नाम गायब होने से हैरान हैं, जबकि उनके पास वोटर ID और आधार कार्ड दोनों हैं।
अब उन्हें लिस्ट में अपना नाम कायम रखने के लिए एक सुनवाई में जाना पड़ रहा है। आनंद ने सोशल मीडिया पर अपनी इस उलझन को साझा किया और बताया कि वोटर रजिस्ट्रेशन का पूरा तरीका कितना उलझाने वाला हो सकता है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन शुरू किया
इन परेशानियों से निपटने के लिए चुनाव आयोग एक स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन योजना लागू कर रहा है। वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या सुधारने की तारीखें बढ़ा दी गई हैं। दिल्ली में 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक आगे कर दी है।
बूथ-स्तर के अधिकारी लोगों के घर-घर जाकर दस्तावेज इकट्ठा करेंगे, ताकि लोगों को बार-बार खुद मौजूद न रहना पड़े। अगर, सुनवाई की जरूरत पड़ती है तो निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के फैसले के अनुसार, कुछ खास परिस्थितियों में इसे ऑनलाइन भी किया जा सकेगा।
इसके साथ ही अगर, जरूरी हुआ तो मतदाता की तरफ से परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य अधिकृत होकर सुनवाई में शामिल हो सकेगा।