3.31 लाख करोड़ रुपये के माइक्रोफाइनेंस उद्योग पर संकट
भारत का 3.31 लाख करोड़ रुपये का माइक्रोफाइनेंस सेक्टर नए संकटों से जूझ रहा है। अल नीनो के कारण कमजोर मानसून और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से ग्रामीण इलाकों की आय पर बुरा असर पड़ रहा है। इससे इस सेक्टर की रिकवरी पर खतरा मंडरा रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी महंगाई और सप्लाई चेन की दिक्कतों को लेकर चिंता जताई है। ऐसे में कर्ज लेने वालों और कर्ज देने वालों दोनों के लिए आगे की राह थोड़ी अनिश्चित दिख रही है।
कर्ज वितरण 8 तिमाही के उच्च स्तर पर पहुंचा
इन सभी जोखिमों के बावजूद मार्च तक इस सेक्टर ने जोरदार वृद्धि दर्ज की है। कर्ज वितरण 8 तिमाही के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, वहीं बकाया कर्ज में भी भारी कमी आई है।
सरकार ने मदद के लिए 20,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी स्कीम की समय सीमा को भी आगे बढ़ा दिया है। हालांकि, माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री नेटवर्क (MFIN) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आलोक मिश्रा का कहना है कि बैंकों को अब और सहयोग देना होगा।
उन्होंने कहा, "इस स्कीम का विस्तार अगस्त तक होने से इसके इस्तेमाल के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। अब बैंकों के लिए यह सही वक्त है कि वे आगे आएं और वित्तीय समावेशन के इस महत्वपूर्ण काम को पूरा समर्थन दें।"