2033 तक भारत में माचा का कारोबार दोगुना होने का अनुमान
भारत में हरी चाय की पत्तियों से तैयार किया माचा का जादू छाया हुआ है। भारत में माचा का बाजार 2025 में 4.57 करोड़ डॉलर (करीब 430 करोड़ रुपये) का रहेगा, जिसके 2033 तक बढ़कर 9.64 करोड़ डॉलर (करीब 910 करोड़ रुपये) तक पहुंचने का अनुमान है।
लोगों की बदलती पसंद और सोशल मीडिया की ताकत इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह है।
टाटा स्टारबक्स ने माचा की बिक्री में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी देखी है। यह साफ दिखाता है कि कैफे इसकी मांग बढ़ा रहे हैं और लोग घरों में भी इसे खूब पसंद करने लगे हैं।
गूगल पर माचा को लेकर सर्च बढ़ा
माचा को लेकर लोगों की उत्सुकता तेजी से बढ़ रही है। गूगल पर 'माचा कैसे बनाएं' और 'माचा प्रोटीन' जैसी चीजों को खोजने वालों की संख्या में 1,300 फीसदी और 2,500 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली के 'सबको' जैसे कैफे में तो औसतन 24 फीसदी पेय पदार्थों की बिक्री अब माचा से बनी चीजों की हो रही है।
जैसे-जैसे लोग इसे ज्यादा आजमा रहे हैं, यह केवल महंगे कैफे तक सीमित नहीं रह गया है। अब यह चलन स्टोर पर मिलने वाले पैकेज्ड मिक्स में भी दिखने लगा है, जिससे माचा की लहर में शामिल होना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।