अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार 5 साल के निचले स्तर पर पहुंची
अगस्त में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार पिछले 5 सालों में सबसे कम दर्ज की गई। इस दौरान मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) गिरकर 52.8 पर पहुंच गया, जो जुलाई में 53.5 था।
यह लगातार तीसरा महीना है, जब विकास दर धीमी पड़ी है, जिसकी मुख्य वजह दुनियाभर में बढ़ रहा तनाव और लगातार महंगे होते ईंधन के दाम हैं।
हालांकि, आर्थिक मोर्चे पर भारत की स्थिति अभी भी काफी अच्छी है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ी है और इस दौरान मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में भी 9.2 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी देखने को मिली है।
ऊंचे ईंधन के दामों के बावजूद रोजगार बढ़ा
PMI मैन्युफैक्चरिंग सर्वे में कहा गया है कि कंपनियों ने (अगस्त में) मांग में नरमी की सूचना दी, जिसके कारण खरीदारी के स्तर और स्टॉक में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी रही, साथ ही रोजगार में भी मामूली गिरावट आई।”
अगस्त में भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के प्रोडक्शन वॉल्यूम में जोरदार बढ़ोतरी जारी रही, लेकिन यह ग्रोथ पिछले 5 सालों के सबसे निचले स्तर पर आ गई। सर्वे के मुताबिक, कंपनियों ने इस सुस्ती की वजह कमजाेर मांग और नए ऑर्डर वॉल्यूम में सीमित बढ़ोतरी को बताया।
ईंधन के बढ़ते दामों के बावजूद कंपनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती जारी रखी। हालांकि, पिछले महीने के मुकाबले यह रफ्तार थोड़ी कम थी।