IBBI अब व्यक्तिगत गारंटर की मनमर्जी पर लगाएगी लगाम
भारत के दिवालियापन नियामक भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) उन लोगों के लिए सख्त नियम बनाने की तैयारी में है, जो कंपनियों के लोन पर गारंटी देते हैं।
IBBI का मकसद सब कुछ पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है, ताकि गलत सौदे कम हों और लोग अपनी जिम्मेदारियों से भाग न पाएं।
इन मुख्य प्रस्तावों में संबंधित लेनदारों से मतदान का अधिकार छीनना शामिल है, जिससे दोस्त-रिश्तेदार किसी फैसले को प्रभावित न कर पाएं। साथ ही, गारंटर की प्रॉपर्टी का मूल्यांकन स्वतंत्र विशेषज्ञों से कराना अनिवार्य किया जाएगा।
कर्ज वापसी योजना की देनी होगी सफाई
अब लेनदारों को हर कर्ज वापसी योजना का अपना व्यावसायिक मूल्यांकन विस्तार से बताना होगा। यह खास तौर पर तब जरूरी होगा, जब कर्ज वापसी की रकम तय किए गए दावों से काफी कम हो।
अगर, गारंटर्स ने कोई संदिग्ध लेन-देन या कम दाम पर कोई सौदा किया है तो उसकी जांच विशेषज्ञ करेंगे और ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर, इन बदलावों का मकसद व्यक्तिगत गारंटर्स से जुड़े नियमों को कंपनियों के लिए बने नियमों के बराबर लाना है। इससे पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकेगी।