भारत में पावर ग्रिड की अड़चनें AI डाटा सेंटर विस्तार में बड़ा खतरा
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डाटा सेंटर्स का विस्तार बहुत तेजी से हो रहा है, जिसमें 250 अरब डॉलर (करीब 24,000 अरब रुपये) से भी ज्यादा का निवेश किया गया है।
इस बढ़ते विस्तार के साथ एक बड़ी समस्या सामने आ रही है। देश के पावर ग्रिड पर इसका दबाव लगातार बढ़ रहा है।
ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, 2032 तक इन डाटा सेंटर्स को 26.3 गीगावाट बिजली की जरूरत पड़ेगी, जबकि अभी यह जरूरत सिर्फ 1.12 गीगावाट ही है। यह एक बहुत बड़ा उछाल है, जिसके लिए हमारा मौजूदा बिजली ढांचा अभी पूरी तरह तैयार नहीं है।
ग्रिड की देरी से जूझ रहे ये राज्य
ओडिशा और महाराष्ट्र दोनों ही राज्य इस समस्या से निपटने के लिए अपने स्तर पर कोशिशें कर रहे हैं। ओडिशा जहां नए सब-स्टेशन बना रहा है, वहीं महाराष्ट्र ने 2030 तक 5 गीगावाट क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में सरकारी और निजी कंपनियों ने मिलकर अब तक 1,500 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
हालांकि, जमीन अधिग्रहण में दिक्कतें, रास्ते के अधिकार से जुड़ी मंजूरियां और सरकारी मंजूरियों में देरी के कारण काम की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
जानकारों का मानना है कि अगर, पावर ग्रिड को समय रहते बेहतर नहीं किया गया तो भारत में डाटा सेंटर के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि AI वाले डाटा सेंटर पुराने सेंटर्स के मुकाबले कहीं ज्यादा और लगातार बिजली की खपत करते हैं। इनकी ऊर्जा की मांग पहले से कहीं ज्यादा और स्थिर होती है।