सस्ते कच्चे तेल और रिकॉर्ड विदेशी निवेश से बॉन्ड यील्ड में जबरदस्त गिरावट
भारत के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में जुलाई 2019 के बाद सबसे तेज मासिक गिरावट देखी गई है और 30 जून को यह 6.72 फीसदी पर पहुंच गया।
इस बड़ी गिरावट के पीछे सस्ता होता कच्चा तेल और भारी विदेशी निवेश अहम वजहें हैं, जो भारत के आर्थिक भविष्य को बेहद उज्ज्वल बना रहे हैं।
FDI बॉन्ड में रिकॉर्ड विदेशी निवेश
जून में तेल के दाम 21 फीसदी से भी ज्यादा गिर गए क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ। इससे एक बड़े तेल आयातक देश होने के नाते भारत को अपने खर्चों में काफी बचत हुई है।
इसी दौरान, विदेशी निवेशकों ने भारत के विशेष बॉन्ड (FAR बॉन्ड) में करीब 3 अरब डॉलर (करीब 250 अरब रुपये) का निवेश किया है, जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है।
HSBC का अनुमान है कि इस वित्तीय वर्ष में भारत 25 अरब डॉलर (करीब 2,300 अरब रुपये) का अधिशेष देख सकता है, जिससे पिछले 2 सालों के घाटे को पीछे छोड़ा जा सकेगा।