आइलैंड कंप्यूटिंग के स्थानीय क्लाउड से दूर होगी स्टार्टअप्स की चिंता
भारतीय स्टार्टअप्स को अब इस बात की चिंता सताने लगी है कि उनके क्लाउड डाटा पर किसका नियंत्रण है। ज्यादातर स्टार्टअप्स अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) और गूगल क्लाउड जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों की सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
ये कंपनियां भारत से बाहर काम करती हैं, इसलिए संवेदनशील जानकारी रखने वाले स्टार्टअप्स के लिए भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन करना मुश्किल हो जाता है।
2031 तक भारतीय क्लाउड बाजार का आकार 68.82 अरब डॉलर (करीब 6,500 अरब रुपये) तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में डाटा को सुरक्षित रखना और उसे भारतीय अधिकार क्षेत्र में रखना एक बड़ी चुनौती बन रहा है।
भारतीय कानूनों का पालन करती है सर्विस
इन चिंताओं को दूर करने के लिए आइलैंड कंप्यूटिंग 2025 में एक ऐसे समाधान के साथ सामने आया है, जिसे खास तौर पर भारत के लिए बनाया गया है।
उनकी क्लाउड सर्विस इस तरह से तैयार की गई है कि वह शुरू से ही भारतीय कानूनों का पालन करती है। इसमें किसी मुश्किल सेटअप की जरूरत नहीं पड़ती।
स्थानीय सुविधाओं का इस्तेमाल करके और सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस (SaaS), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साथ ही एजेंटिक वर्कलोड्स पर ध्यान केंद्रित करके वे स्टार्टअप्स को पैसा बचाने और अपने डाटा पर नियंत्रण रखने में सक्षम बनाते हैं। साथ ही सभी जरूरी नियमों का पालन भी सुनिश्चित करते हैं।