लाखों फॉलोअर्स होने के बाद भी क्रिएटर्स को समय पर नहीं मिलता भुगतान
माइक्रो और नैनो क्रिएटर्स क्षेत्रीय मार्केटिंग में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इन लोगों के फॉलोअर्स की संख्या एक लाख तक होती है। इसके बावजूद उन्हें देर से भुगतान और कमाई की अनिश्चितता जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस और हैशफेम की एक ताजा रिपोर्ट बताती है कि गैर-मेट्रो इन्फ्लुएंसर्स में नैनो क्रिएटर्स की संख्या आधे से ज्यादा है। हालांकि, इनमें से कई को ब्रांड अप्रूवल की धीमी प्रक्रिया और ऐसे कॉन्ट्रैक्ट्स से जूझना पड़ता है, जिनमें भुगतान की कोई तय तारीख ही नहीं होती।
लंबी भुगतान प्रक्रिया से जेब पर आता है खर्चा
कभी-कभी 90 दिनों तक खिंचने वाली लंबी भुगतान प्रक्रिया का सीधा मतलब यह है कि क्रिएटर्स को अक्सर प्रोडक्शन का सारा खर्च अपनी जेब से करना पड़ता है। इसके बाद उन्हें अपने पैसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
व्हाट्सऐप, ईमेल या डायरेक्ट मैसेज पर होने वाले सौदों में कई बार भुगतान की शर्तें साफ नहीं होतीं, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। मैनेजर्स या कानूनी सलाह न होने के कारण इन छोटे क्रिएटर्स के पास बातचीत करने की ताकत कम होती है और उनके लिए सुरक्षा के उपाय भी बहुत कम होते हैं।
विशेषज्ञों का कमाई के नए रास्तों पर जोर
उद्योग के जानकार ऐसे सख्त अनुबंध बनाने की सलाह देते हैं, जिनमें भुगतान की तारीखें साफ-साफ तय हों। वे क्रिएटर्स को केवल ब्रांड सौदों पर निर्भर न रहकर कमाई के दूसरे रास्ते तलाशने के लिए भी प्रोत्साहित करते हैं।
अपना खुद का उत्पाद लॉन्च करने या अपनी बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) बनाने जैसे कदम उनकी कमाई को स्थिरता दे सकते हैं और भुगतान के लिए इंतजार करने के तनाव को भी कम कर सकते हैं।