भारतीय IT कंपनियां अब अमेरिका में ही तैयार कर रही अपने लिए कर्मचारी
पिछले 5 सालों में भारतीय IT कंपनियों ने अमेरिका में 1.1 अरब डॉलर (करीब 105 अरब रुपये) का निवेश किया है। अब इन कंपनियों का मुख्य ध्यान H-1B वीजा पर ज्यादा निर्भर रहने के बजाय, वहां की स्थानीय प्रतिभाओं को निखारने पर है।
यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि अमेरिका H-1B वीजा की फीस बढ़ाने पर विचार कर रहा है। इसी वजह से कंपनियां अब विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में देश के भीतर ही अपनी टीमें बना रही हैं, ताकि काम वहीं से संभाला जा सके।
29 लाख छात्रों को मिला सीधा फायदा
नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (NASSCOM) के आंकड़ों के अनुसार, इस निवेश से अमेरिका में 29 लाख छात्रों और 2.55 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा मिला है।
भारतीय IT फर्म अमेरिका की 130 यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के साथ मिलकर STEM शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा दे रही हैं। इससे एक ऐसा कार्यबल तैयार हो रहा है, जो तकनीकी नौकरियों के लिए विदेशी वीजा पर कम निर्भर रहेगा।