भारत के स्टार्टअप्स चिप डिजाइन में कामयाब, अब खरीदार ढूंढना बड़ी चुनौती
पिछले एक साल में कई भारतीय सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स ने 'टेप-आउट' का काम पूरा कर लिया है। यह वह स्टेज है, जब चिप डिजाइन को मैन्युफैक्चरिंग के लिए फाउंड्री में भेजा जाता है।
उद्योग के अधिकारियों और निवेशकों का कहना है कि असली चुनौती तब शुरू होती है, जब स्टार्टअप्स को चिप्स की टेस्टिंग करनी होती है और संभावित ग्राहकों को सैंपल भेजने होते हैं।
C2i, अग्निट और सोफ्रोसिन जैसे भारतीय चिप स्टार्टअप्स शानदार चिप डिजाइन कर रहे हैं, लेकिन इन डिजाइंस को असल कमाई में बदलना इतना आसान नहीं।
एक डिजाइन से मास-प्रोडक्शन तक पहुंचने में काफी वक्त लगता है, जिसमें ढेर सारी टेस्टिंग और ग्राहकों के साथ 'प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट' प्रोजेक्ट्स को पूरा करना जरूरी होता है।
अग्निट डिफेंस और टेलीकॉम के लिए तैयार कर रही चिप्स
भारत का चिप बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2026 में यह 12.4 अरब डॉलर (करीब 1,200 अरब रुपये) से बढ़कर 2031 तक 17.4 अरब डॉलर (करीब 1,700 अरब रुपये) हो जाएगा। ऐसे में ये स्टार्टअप्स अपने-अपने खास क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं।
अग्निट जहां डिफेंस और टेलीकॉम के लिए चिप्स तैयार कर रहा है, वहीं सोफ्रोसिन मेडिकल डिवाइसेज पर फोकस कर रहा है।
हालांकि, बड़े ग्राहकों को खोजना और चिप्स की मैन्युफैक्चरिंग तक पहुंच बनाना अभी भी बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद, अग्निट के पास अभी 5 पेड प्रोजेक्ट्स हैं और कंपनी को उम्मीद है कि अगले 9-12 महीनों में इनमें से कम से कम 2 प्रोजेक्ट्स लंबे अनुबंध में बदल जाएंगे।
दूसरी तरफ, सोफ्रोसिन अपने चिप्स को बाजार में उतारने के लिए और ज्यादा फंडिंग की तलाश में है। भारत में घरेलू चिप उद्योग खड़ा करने का जुनून तो बहुत गहरा है, लेकिन रास्ता अभी भी चुनौतियों से भरा है।