भारतीय कंपनियां AI की मदद से 80 फीसदी तेजी से बना रहीं विज्ञापन
इस फेस्टिव सीजन में ब्रांड्स अपने विज्ञापनों को तेज, सस्ता और ज्यादा निजीकृत बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रहे हैं।
ओप्पो, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) लाइफ इंश्योरेंस और हायर जैसी बड़ी कंपनियां अब महंगे स्टूडियो शूट से बच रही हैं। वे विज्ञापन बनाने से लेकर उन्हें टेस्ट करने तक हर काम के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं।
फेस्टिव सीजन में भारत के सालाना विज्ञापन खर्च (60,000-62,000 करोड़ रुपये) का एक-तिहाई से भी ज्यादा हिस्सा होता है। ऐसे में ब्रांड्स तेजी से और नए-नए क्रिएटिव विज्ञापन बनाना चाहते हैं।
प्रोडक्शन का समय 70-80 फीसदी घटा
AI की वजह से ब्रांड्स को पारंपरिक 30 से 90 सेकेंड के टीवी कमर्शियल बनाने में लगने वाला खर्च कम करने में मदद मिल रही है। आमतौर पर इन विज्ञापनों को बनाने में 50 लाख रुपये से ज्यादा लगते हैं। साथ ही, इससे प्रोडक्शन का काम भी तेजी से हो रहा है। रेने कॉस्मेटिक्स ने AI से बने विज्ञापनों के कारण अपने जुड़ाव में 30.16 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की। उन्होंने प्रोडक्शन का समय भी 70-80 फीसदी तक कम कर लिया।
फर्न्स एन पेटल्स ने भी अपने क्रिएटिव बनाने और उन्हें लागू करने की गति में लगभग 4 गुना तेजी देखी। इससे वे कम समय में ही बड़ी संख्या में क्रिएटिव तैयार कर पाए, उन्हें टेस्ट कर पाए और फिर उनका इस्तेमाल भी कर पाए।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि AI विचारों को हकीकत में बदलने और काम को पूरा करने के लिए तो बहुत बढ़िया है, लेकिन यह उस मानवीय स्पर्श की जगह नहीं ले सकता, जो असल भावनात्मक जुड़ाव के लिए जरूरी है।